इश़्क की फिर शुरुवात हो रही है बातें करते करते रात हो रही हैं! अंजान है वो और मैं भी एकदम अभी हल्की सी पहचान हो रही हैं! सोचने बैठे थे उसके बारे में सुबह थोड़ी देर में देखा तो शाम हो रही हैं! सोचते है ना पड़े मोहब्बत में दोबारा मगर सुना है मेरी ही बात हो रही हैं! 'ललित' तो ढल जायेगा हर हाल में मगर वों ही तो नहीं तैयार हो रही हैं!
प्यार की कीमत तो चुकानी पड़ेगी, तकलीफ थोड़ी तो उठानी पड़ेगी! बहुत तो खुश रहे हम दोनों साथ, अब गमजद़ा जिन्दगी बितानी पड़ेगी! कब तक चलता रहेगा ऐसे ही सब, वजह कुछ तो हमको बतानी पड़ेगी! खत्म कर दिया जाये ये रिश्ता अब, बात घरवालों से सब छिपानी पड़ेगी! मजा आया था दिल लगी में जितना, दूरी उतनी ही अब हमें बनानी पड़ेगी! कहाँ तक सफल रहा रिश्ता हमारा, किताब यादों की फिर से उठानी पड़ेगी!
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