संदेश

क्यूं ना जाति काॅलम हटा दिया जाये!

  आरक्षण नाम तो सबने सुना ही होगा एक शब्द छोटा सा है। जो कि दलितों को आगे बढ़ाने में बहुत ही सहायक हैं। आरक्षण किसी का भी पुश्तैनी हक नही है और ना ही विरासत है!     अब सवाल ये उठता है कि आरक्षण का क्या सदुपयोग हो रहा है। इसको लागूं करने की नीति क्या है?     आरक्षण को बाबा साहब ने दलितों और पिछड़ी जाति के लोगों के लिये लागूं किया था जिससे कि उनका शोषण बन्द हो और वो आगे बढ़ सके!     क्या अब आरक्षण की आवश्कता है? मेरे ख्याल से तो नहीं,आज आप सबने दलितों को ये कहते सुना होगा हम किसी से कम नही है और हमें किसी के एहसान की जरूरत नहीं है हमें अपना हक चाहिए! उनसे कोई ये पूंछे आरक्षण आपका हक कैसे हो गया? ये तो दस वर्षो के लिये था आज कितने वर्ष हो गये है?      आरक्षण के कारण ही आज योग्य लोग पीछे होते जा रहे है! अगर बात करें नौकरियों की तो वहां तय रहता है कि कितनी सीटे पिछडी और दलितों के लिये है । देखा जाये तो जब दलित लोग साथ बैठकर सबके पढाई करते है तो बराबर ही तो पढ़ रहे है कहाँ हो रहा है शोषण? वो ही बताये?      क्या आरक्ष...
चित्र
आते जाते सबसे तेरा हाल पूछँ लेता हूं, कुछ पल रोज तेरा ख्याल देख लेता हूं! मिलती कहा है अब फुरसत हमको उतनी, जितनी है उसमें तुम्हारा बखान कर लेता हूं! मन में क्या है तुम्हारे अब क्या जानूं मैं, बस तेरी मुस्कान को ही प्यार मान लेता हूं!  कई राहों पर चलकर देखा है आजतक, अब प्यार के राह पर चलकर देख लेता हूं! 'ललित' मिल जायेगी मंजिल दावा है मेरा, बस नया कोई फिर प्रयास खोज लेता हूं!

कैफ

ये कैफ़ तेरा कैसा मुझपर भारी हैं या फिर तेरे ही इश़्क की खुमारी हैं! एक भी मुक्कमल ना हुआ सपना पूछों नींद से फिर क्यूं की उसने यारी हैं! क्यूं रहता हैं समुद्र खारा,पूछो उससे भी दरिया की तो निर्मल जल से यारी हैं! अंदाज ए गुफ्तगूं ऐसे की मेरे हाल पर जल्द ही इसी तर्न्नुम में तुमहारी बारी हैं! बुझा रहे हो आग,दिल की भी बुझा दो इस दिल में बस तेरी ही लपटें अब सारी हैं! याद तुम्हारी दून बन गयी कश्मीर बन गयी अब मुझपर तो तेरी ही हो रही बर्फबारी हैं! ज़माना क्यूं ना अब ललित खुदगर्ज समझें सबसे की दुश्मनी और तेरे से जो की यारी हैं!

मन्दिर

मन्दिरों में अब रोज जाने लगे हैं भगवान में विश्वास जताने लगे हैं! मिल पाओं अगर तुम मस्जिद में इसलिये अजान सीखकर आने लगे हैं! सुना है गुरद्वारे में मत्था टीकती हो तुम इसलिये गुरूग्रंथसाहिब उठाने लगे हैं! करती हो प्रार्थना तुम चर्च में सन्डे को हम भी इसीलिये कैन्डिल जलाने लगे हैं! अपना बनाओगी ललित को कभी तुम इस आस में पूछा सबसे छुड़ाने लगे हैं!           ललित      7754019301
@@@@@बन्दिशें@@@@@ कैसे समझाऊं तुझको तूं समझ नहीं पाती हैं, बार बार गलती वही अपनी गलती दोहराती हैं, कहा ना करो मिसकॉल, फिर भी तूं फसाती हैं अनजान नम्बर पर मम्मी अब शक लगाती हैं! कैसे समझाऊं... यही नहीं रूकती उन्होने तरकीब निकाली हैं, ट्रयूकॉलर पर नम्बर को अब सर्च लगाती हैं, देखकर तेरा नाम वो फिर गुस्से हो जाती हैं, ब्लाक लिस्ट में डालने को नम्बर कह जाती हैं! कैसे समझाऊं..... इंस्टग्राम और फेसबुक फ्रेण्ड निकालती हैं, एक एक लड़की की वो परिचय भी मांगती हैं, अंजान हो कोई तो उसे अनफ्रेण्ड करवा देती हैं, रात को जगनें में भी अब तो बन्दिशें लगाती हैं! कैसे समझाऊं......

अपना बना कर देखें

आओ फिर आपस में हाथ मिलाकर देखें जो बनी नहीं बात वो बात बना कर देखें! हर और हैं कोई ना कोई मुसीबत यहां चलो तूफां में भी कश्ती को तैरा कर देखें! साहिल पर पहुंच जायेगी अपनी नईया बस इक दूजे पर विश्वास जता कर देखें! ना मानी बात तो फिर पछताओगी तुम सोचा एक बार फिर से समझा कर देखें! 'ललित' को तो मिल रहे हैं बथेरे यहां पर पर सोचा क्यूं ना तुम्हे अपना बना कर देखे!           ललित 7754019301

शेर

मंगल को मैं सबकी शुक्र मनाया करता हूँ, और शुक्र को भी सब मेरी मंगल तो मांगें!                    ललित               7754019301